• Abhimanyu Kumar

सुशांत-रिया के रिश्ते से प्रेम पिपासु युवा पीढ़ी क्या सीख सकती है



बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने पटना के राजीवनगर थाने में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया है.

एफ़आईआर की कॉपी सोशल मीडिया पर तैर रही है, उम्मीद है कि आपने भी पढ़ी होगी.

पिता ने बेटे की प्रेमिका रहीं रिया पर आरोप लगाया कि वो सुशांत पर करियर को लेकर दबाव बनाती थीं और उसे अपने कब्जे में करना चाहती थीं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि रिया और उनके परिवार ने पहले सुशांत को मानसिक रूप से बीमार किया और फिर उसे उसके परिवार से अलग-थलग कर दिया.

इतना ही नहीं रिया पर यह भी आरोप लगे हैं कि उन्होंने सुशांत के बैंक अकाउंट से 17 में से 15 करोड़ ग़लत तरीके से हड़प लिए.

रिया सुशांत के साथ फ़िल्में करना चाहती थीं और जो भी प्रोड्यूसर सुशांत के लिए ऑफर लेकर आता, उस पर रिया खुद को फ़िल्म में को-स्टार रखने की शर्त रखतीं.

इस रवैये से सुशांत को फ़िल्मों के ऑफर मिलने बंद हो गए. ऑफर नहीं मिलने के दूसरे कारण भी रहे हैं, जैसे- बाहरी, नेपोटिज्म, गुटबाजी. अब सुशांत केरल में अपने दोस्त महेश के साथ ऑरगेनिक फार्मिंग करना चाहते थे.

फिर क्या था रिया अचानक से सुशांत से अलग हो गईं और उन्हें अकेला छोड़ गईं, जिसके छठे दिन सुशांत ने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली.


दोस्तों, मतलब से जुड़े प्रेमी—प्रेमिकाएं अक्सर ऐसा ही करते हैं, जैसे रिया चक्रवर्ती ने कथित तौर पर सुशांत सिंह राजपूत के साथ किया.

समाज में बनते और बिगड़ते रिश्तों के गहन अध्ययन के बाद यह कह सकता हूं कि वर्षों के रिश्ते मतलब निकल जाने के बाद इसी तरह अचानक ख़त्म कर दिए जाते हैं.

अक्सर डिच करने वाला पार्टनर दुनिया की नज़रों में सही बने रहने के लिए सीबीआई जांच की मांग करता है, फ्यूनरल में शामिल होने की बात कहता है, रोता है. वो यह दिखाना चाहता है कि वो सामने वाले से बहुत प्यार करता था और सामने वाला ही हर तरह से ग़लत, झूठा और बुजदिल था.

ये सारे झूठ-फरेब के खेल हक़ीक़त पर पर्दा डालने की साजिश के तहत खेले जाते हैं.

अब जरा सोचिए अगर सुशांत समय रहते थोड़ा टफ हो जाते तो रिया उसे पागल और साइको घोषित कर सकती थीं. और अगर यह नहीं कर पातीं तो सुशांत पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप लगा सकती थीं, उन्हें बदनाम कर सकती थीं. ग़लत मुकदमें में फंसा सकती थीं.

ऐसी स्थिति में दो ही बातें होतीं. या तो वो ग़लत के ख़िलाफ़ लंबी और यातनापूर्ण लड़ाई लड़तें और जीततें. या फिर हार जातें. पर दोनों ही परिस्थितियों उनका करियर ख़त्म हो जाता, यह तय था. महज आरोप लग जाने के बाद उन्हें इंडस्ट्री काम नहीं देती. उन्हें वो इज़्ज़त नहीं बख्शी जाती, जो वो पाते आए थे.


अक्सर प्रेमी—प्रेमिकाएं रिश्ता विच्छेद के बाद खुद को सही साबित करने और बदले की भावना में अपने पार्टनर के सबसे कमजोर पक्ष पर प्रहार करते हैं या फिर उसके सबसे बड़े दुश्मन के साथ खड़े हो जाते हैं.

पर समझने वाली बात यह है कि जिस इंसान ने आपको सालों तक खुशियां दी हों और एक वक़्त के बाद आप उसके ख़िलाफ़ खड़े हो जाते हैं तो यह साफ़ संदेश जाता है कि आप कितने मतलबी हैं.

आपने उस प्यार की इज़्ज़त रखी ही नहीं, जो उसने दिया था. अगर आपको कोई प्यार और सुख देता है तो यह तय है कि वो दुख भी देगा. अगर सुख और खुशी पाने पर आपने ढिंढोरा नहीं पीटा था तो दुख पाने पर क्यों?

कल तक आप जिसके गुणगान करते नहीं थकते थे, अचानक से आप उसकी बुराई करने लगते हैं. ऐसा कैसे संभव है? और कितना सही है?


मेरी समझ में रिश्ता और प्रेम बेहद निजी मामले होते हैं, अगर इनके जुड़ने और बनने की खनक दुनिया को नहीं सुनाई देती है तो टूटने की चीख सरेआम क्यों की जाती है? पर्दे में पनपा प्यार अगर पर्दे में ही ख़त्म हो जाता है तो उसका एहसास ज़िंदगी भर चेहरे पर मुस्कान लाता है.

ज़रूरी नहीं है कि हर प्रेम संबंध सामाज के प्रमाणित रिश्ते के अंजाम तक पहुंचे, पर यह ज़रूर आपके हाथ में होता है कि आप इसके अलावा भी अपने रिश्ते को एक मुकम्मल अंजाम दे सकते हैं.

रिश्ता विच्छेद के बाद खुद को सही साबित करने के लिए जिस दुनिया के सामने आप रोना रोते हैं, वो सिवाय मजे लेने के कुछ नहीं करती. वो आप दोनों के बीच पनपी ग़लतफहमियों को दूर नहीं कर सकती, न ही आपको एक सम्मानजनक विच्छेद के रास्ते पर ले जाती है.

फिर होता ये है कि पब्लिक सपोर्ट की चाहत में फासले इतने बढ़ जाते हैं कि भविष्य में संभावित पैचअप की राह भी बंद हो जाती है.


याद रखिए समय और भावनाएं बदलती रहती हैं. जोड़ के बाद घटाव आता है तो घटाव के बाद जोड़ भी होता है. अगर जोड़-घटाव भविष्य में न भी हो तो कम से कम एक ऐसा बर्ताव बना रहना चाहिए कि कभी किसी मोड़ पर मुलाक़ात हो तो एक मीठी सी मुस्कान से एक-दूसरे का इस्तक़बाल हो. कड़वाहट भरी नज़रों से नहीं.

अंतिम और ज़रूरी बात, अगर कोई आपकी तरफ सिर्फ इसलिए आकर्षित हो रहा है क्योंकि आप सफल और पैसे वाले हैं तो कभी भी उसके साथ रिश्ते में न आएं. ऐसे लोग आपको आपकी बदहाली के वक़्त छोड़ कर चले जाएंगे, ये गारंटी है.

आपको आपकी कंगाली में चाहने वाले की तलाश करनी चाहिए.

एक बात और, अगर आपसे कोई इसलिए जुड़ना चाहता है क्योंकि उसे लगता है कि आपकी सफलता, आपके अनुभव और आपका नेटवर्क उसको उसकी मंजिल पाने में मदद कर सकते हैं तो यह गारंटी मानिए कि एक वक़्त के बाद आप उसके किसी काम के नहीं रह जाएंगे, जैसे सुशांत रिया के लिए रह गए थे.

अक्सर निरंतर ऊपर चढ़ने वालों के लिए सीढ़ियां किसी काम की नहीं रह जाती हैं. इसलिए रिश्ते में सीढ़ी मत बनिए, साथ चलने वाली गाड़ी का पहिया बनिए.


(मेरे इस ब्लॉग का मकसद फ़िल्म अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को बदनाम करना नहीं है, न ही उनकी छवि को बिगाड़ना है. न ही यह दर्शाना है कि वो एक बुरी इंसान हैं. यह ब्लॉग सुशांत और रिया के प्रेम संबंध में पनपी इस स्थिति का महज एक विश्लेषण है, जिसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखे जाने की ज़रूरत है.)


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